Ein Sophist über das Studium der Philosophie
Platon
| Φιλοσοφία | γάρ | τοί | ἐστιν, | ὦ | Σώκρατες, | χαρίεν, |
| Philosophie | nämlich | folglich | ist, | oh | Sokrates, | reizend, |
| ἐάν | τις | αὐτῆς | μετρίως | ἅψηται | ἐν | τῇ | ἡλικίᾳ· |
| falls | irgendein | selbige | mäßig | e-befasst | in | der | Lebensalter: |
| ἂν | δὲ | μᾶλλον | τοῦ | δέοντος | ἐνδιατρίψῃ, | διαφθορὰ |
| falls | aber | mehr | des | nötigen | e-beschäftigen-soll, | Verderben |
| τῶν | ἀνθρώπων. | Ἐὰν | γὰρ | καὶ | πάνυ |
| der | Menschen. | Falls | nämlich | und | ganz |
| εὐφυὴς | ᾖ | καὶ | πόρρω | τῆς | ἡλικίας | φιλοσοφῇ, |
| begabt | sein | und | ferner | die | Lebensalter | philosophieren-soll, |
| ἀνάγκη | ἐστὶν | πάντων | τῶν | πολιτικῶν | ἄπειρον |
| Notwendigkeit | ist | aller | der | politischen | un-erfahrenen |
| αὐτὸν | γενέσθαι. |
| selbigen | ensteht. |
| Ἐπειδὰν | οὖν | ἔλθῃ | εἴς | τινα | ἰδίαν | ἢ | πολιτικὴν |
| Sobald-als | also | e-geht | hinein | irgendwelche | eigene | oder | öffentliche |
| πρᾶξιν, | καταγέλαστος | γίγνεται, | ὥσπερ | γε | οἶμαι | (Peränthese) |
| Tätigkeit, | lächerlichster | entsteht, | wie | wenigstens | glaube-ich |
| οἱ | πολιτικοί, | ἐπειδὰν | αὖ | εἰς | τὰς | ὑμετέρας |
| die | Politiker, | sobald-als | wieder | hinein | die | eure |
| διατριβὰς | ἔλθωσιν | καὶ | λόγους, | καταγέλαστοί |
| Beschäftigung | e-gehen-sollen | und | Worte, | lächerlichste |
| εἰσιν. | Συμβαίνει | γὰρ | τὸ | τοῦ | Εὐριπίδου· | (elliptisch…) |
| sind. | Mit-kommt | nämlich | das | des | Euripides: | x |
| λαμπρός | τέ | ἐστιν | ἕκαστος | ἐν | τούτῳ | ἵνʹ | αὐτὸς |
| glänzender | nur | ist | jeder | in | diesem | dort | selbiger |
| τυγχάνει | βέλτιστος | ὤν· | ὅπου | δʹ | ἂν | φαῦλος | ᾖ, |
| zufällig-ist | bester | seiender: | der-wo | ab’ | falls | schlechter | sei, |
| ἐντεῦθεν | φεύγει | καὶ | λοιδορεῖ | τοῦτο. |
| und | beschimpf’ | dieses. |
| Ἀλλʹ | οἶμαι | τὸ | ὀρθότατόν | ἐστιν | ἀμφοτέρων |
| Aber | glaube-ich | das | aufrechteste | ist | beider |
| μετασχεῖν· | φιλοσοφίας | μέν, | ὅσον | παιδείας |
| e-zu-teil-haben: | Philosophie | zwar, | wie-groß | Erziehung |
| χάριν | καλόν | ἐστι | μετασχεῖν, | καὶ | οὐκ | αἰσχρὸν |
| wegen | schönes | ist | e-zu-teil-haben, | und | nicht | schlechteres |
| μειρακίῳ | ὄντι | φιλοσοφεῖν· | ἐπειδὰν | δὲ | ἤδη |
| jungem-Mann | seiendem | zu-philosophieren: | sooft | aber | e-ist |
| πρεσβύτερος | ὢν | ἄνθρωπος | ἔτι | φιλοσοφῇ, |
| älterer | seiender | Mensch | noch | philosophiere, |
| καταγέλαστον, | ὦ | Σώκρατες, | τὸ | χρῆμα | γίγνεται. |
| lächerliches, | oh | Sokrates, | das | Sache | entsteht. |
| Παρὰ | νέῳ | μὲν | γὰρ | μειρακίῳ | ὁρῶν | φιλοσοφίαν |
| Von | neuem | zwar | nämlich | jungem-Mann | sehender | Philosophie |
| ἄγαμαι | καὶ | ἡγοῦμαι | ἐλεύθερόν | τινα | εἶναι |
| bewundere-ich | und | führe-ich | freies | irgendwelche | zu-sein |
| τοῦτον | τὸν | ἄνθρωπον, | τὸν | δὲ | μὴ | φιλοσοφοῦντα |
| diesen | den | Menschen, | den | aber | nicht | philosophiere |
| ἀνελεύθερον. | Ὅταν | δὲ | δὴ | πρεσβύτερον | ἴδω |
| un-freien | Sofern | aber | folglich | älteren | e-sehe-ich |
| ἔτι | φιλοσοφοῦντα, | πληγῶν | μοι | δοκεῖ | δεῖσθαι, |
| noch | philosophiere, | Schläge | mir | scheint | zu-brauchen, |
| ὦ | Σώκρατες, | οὖτος | ὁ | ἀνήρ. | Δεῖ | γὰρ | τοῦτον |
| oh | Sokrates, | dieser | der | Mann. | Braucht | nämlich | diesen |
| τὸν | ἄνθρωπον, | κἂν | πάνυ | εὐφυὴς | ᾖ, | ἄνανδρον |
| den | Menschen, | und | ganz | begabt | sei, | un-männlichen |
| γενέσθαι | φεύγοντα | τὰς | ἀγοράς. |
| zu-entstehen | meid | die | Marktplätze. |


