Mahnrede
Clemens Alexandrinus
| Σπεύσωμεν, | δράμωμεν, | ὦ | θεοείκελα | τοῦ | λόγου |
| E-eilen-sollen-wir, | e-laufen-sollen-wir, | oh | gottähnliche | des | Wortes |
| ἀγάλματα· | σπεύσωμεν, | δράμωμεν, | ἄρωμεν | τὸν |
| Kostbarkeiten: | e-eilen-sollen-wir, | e-laufen-sollen-wir, | heben-sollen-wir | das |
| ζυγὸν | αὐτοῦ, | ἐπιβάλωμεν | ἀφθαρσίᾳ, | καλὸν |
| Joch | selbigens, | e-auf-ziehen-sollen-wir | Unvergänglichkeit, | schönen |
| ἡνίοχον | ἀνθρώπων | τὸν | Χριστὸν | ἀγαπήσωμεν. |
| Wagenlenker | Menschen | den | Christum | e-lieben-sollen-wir. |
| Φιλότιμοι | τοίνυν | πρὸς | τὰ | καλὰ | γενώμεθα, | καὶ |
| Ehrgeizige | deshalb | zu | die | schönen | werden-sollen-wir, | und |
| τῶν | ἀγαθῶν | τὰ | μέγιστα, | θεὸν | καὶ | ζωήν, |
| der | Tugenden | die | größten, | Gott | und | Leben, |
| κτησώμεθα. | Ἀρωγὸς | δὲ | ὁ | λόγος· | θαρρῶμεν |
| erwerben-sollen-wir. | Helfer | aber | der | Wort: | mutig-sein-sollen-wir |
| αὐτῷ | καὶ | μήποτε | ἡμᾶς | τοσοῦτος | πόθος |
| selbigem | und | niemals | uns | so-großes | Verlangen |
| ἀργύρου | καὶ | χρυσοῦ | καὶ | δόξης | ἐπέλθῃ, | ὅσος |
| Silbers | und | Goldes | und | Meinungs | e-auf-gehen-soll, | wie-groß |
| αὐτοῦ | τοῦ | τῆς | ἀληθεῖας | λόγου. |
| selbigens | des | der | Wahrheit | Wortes. |
Angst vor der Zukunft Matthäus
| Μὴ | οὖν | μεριμνήσητε | λέγοντες· | „Τί | φάγωμεν |
| Nicht | also | sorgen-sollt | sprechende: | „Was | e-essen-sollen-wir |
| ἢ | τί | πίωμεν | ἢ | τί | περιβαλώμεθα;“ | Πάντα | γὰρ |
| oder | was | e-trinken-sollen-wir | oder | was | e-über-ziehen-sollen-wir?“ | Alle | nämlich |
| ταῦτα | τὰ | ἔθνη | ἐπιζητοῦσιν· | οἶδεν | γὰρ | ὁ | πατὴρ |
| diese | die | Völker | auf-suchen: | Hat-gewusst | nämlich | der | Vater |
| ὑμῶν | ὁ | οὐράνιος, | ὅτι | χρῄζετε | τούτων | ἁπάντων. |
| euer | der | himmlische, | dass | braucht-ihr | dieser | aller. |


